दुख क्यों मांगा कुंती ने श्रीकृष्ण से !वर्फानी बाबा


महाभारत के युद्ध के बाद कुंती ने श्रीकृष्ण से मांगा ये उपहार ! वर्फानी बाबा! बदरीनाथ धाम!

महाभारत का युद्ध खत्म हो गया था। युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर की राजगादी संभाल ली थी। सब कुछ सामान्य हो रहा था। एक दिन वो घड़ी भी आई जो कोई पांडव नहीं चाहता था। भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे थे। सारे पांडव दु:खी थे। श्रीकृष्ण उन्हें अपना शरीर का हिस्सा ही लगते थे, जिसके अलग होने के भाव से ही वे कांप जाते थे। लेकिन श्रीकृष्ण को तो जाना ही था।

पांचों भाई और उनका परिवार श्रीकृष्ण को नगर की सीमा तक विदा करने आया। सब की आंखों में आंसू थे। कोई भी श्रीकृष्ण को जाने नहीं देना चाहता था। भगवान भी एक-एक कर अपने सभी स्नेहीजनों से मिल रहे थे। सबसे मिलकर उन्हें कुछ ना कुछ उपहार देकर श्रीकृष्ण ने विदा ली। अंत में वे पांडवों की माता और अपनी बुआ कुंती से मिले।

भगवान ने कुंती से कहा कि बुआ आपने आज तक अपने लिए मुझसे कुछ नहीं मांगा। आज कुछ मांग लीजिए। मैं आपको कुछ देना चाहता हूं। कुंती की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने रोते हुए कहा कि हे श्रीकृष्ण अगर कुछ देना ही चाहते हो तो मुझे दु:ख दे दो। मैं बहुत सारा दु:ख चाहती हूं। श्रीकृष्ण आश्चर्य में पड़ गए।

Comments

Popular posts from this blog

*फोन टैप करने के लिए केवल 10 एजेंसियां अधिकृत : केंद्र सरकार

खाकी के पीछे छिपी अंतर्वेदना क्या महशूस की आपने

बेहद खतरनाक होता है स्टोन फिश का जहर